Tax On Pizza: पिज़्ज़ा लवर के लिए आई बुरी खबर अब पिज़्ज़ा हुआ मेहगा जानिए क्या है कारण

खाने-पीने के शौकीनों का पिज्जा हमेशा पसंदीदा रहा है, भारत में प्रतिदिन अनुमानित 100000 से 200000 पिज्जा की खपत होती है, और यह करोड़ों रुपये का कारोबार बन गया है, जो हर दो साल में दोगुना हो जा रहा है। पिज्जा इटली का एक मूल व्यंजन है, जो आम तौर पर गोल आकार का होता है, और इसमें टमाटर, पनीर, और कई अन्य सामग्री (जैसे मशरूम, प्याज, अनानास, मांस, आदि) डाला जाता है, जिसे उच्च तापमान पर ओवन में बेक किया जाता है। फैटी चीज़ बर्स्ट, मांस या मीठे सॉस और टॉपिंग पिज्जा के इतने अच्छे स्वाद के प्रमुख कारणों में से एक हैं।

पिज्जा पर लगने वाला है टैक्स

लेकिन यह बात आपको जानकर के हैरानी होगी कि, आपके मनपसंद पिज्जा पर कर (Tax) कैसे निर्धारित किए जाते हैं।
रेस्टोरेंट में बेचें और खाए जाने वाले पिज्जा पर अलग कर (Tax) और और घर पर डिलीवरी किए जाने वाले पिज्जा पर अलग कर (Tax) लगता है

जी हां आपने सही सुना जो पिज्जा आप रेस्टोरेंट में खाते हैं उस पर सिर्फ 5% GST लगता है, और अगर वही पिज्जा आप अपने घर पर मंगाते हैं, तो 18% GST लगता है

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अगर आप बस पिज्जा का बेस लेते हो तो उस पर 12% GST लगता है इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा अपीलीय प्राधिकरण ने कहा है, कि चूंकि पिज्जा टॉपिंग पिज्जा नहीं है, और पिज़्ज़ा टॉपिंग में 22% वेजिटेबल ऑयल होता है, इसलिए अब से पिज्जा टॉपिंग्स पर 18% GST लगने वाला है, अब चाहे आप पिज्जा रेस्टोरेंट में खाएं चाहे घर पे मंगा कर खाएं आपको टैक्स उतना ही ज्यादा चुकाना होगा।

पिज्जा पर कर (Tax) निर्धारण

हरियाणा अपीलीय प्राधिकरण ने टॉपिंग में उपयोग की जाने वाली सभी सामग्रियों पर विचार किया और निष्कर्ष निकाला कि पिज्जा टॉपिंग को ‘चीज़ टॉपिंग’ के रूप में बेचा जाता है, यह वास्तव में पनीर नहीं है और इसलिए उच्च करों को आकर्षित करना चाहिए।
जैसे ही निर्णय सार्वजनिक हुआ, इसने ऑनलाइन एक बड़ी चर्चा पैदा कर दी, जिससे अधिकांश आश्चर्याचकित हो गए। इसने इस बारे में भी बातचीत शुरू की कि कैसे होम डिलीवरी में रेस्तरां में खाने से ज्यादा टैक्स देना शामिल है

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इन अलग-अलग GST दरों से पिज्जा ब्रांडों के लिए दुविधा पैदा हो सकती है। पिज्जा ब्रांडों ने अभी इस मामले पर प्रतिक्रिया नहीं दी है

GST के तहत उत्पादों का वर्गीकरण एक जटिल मुद्दा रहा है। उदाहरण के लिए, जबकि लस्सी और दूध पर जीएसटी के तहत कर नहीं लगाया जाता है, फ्लेवर्ड दूध पर 12% कर लगता है, और फ्लेवर्ड लस्सी कर व्यवस्था के दायरे से बाहर है। इसलिए कर निर्धारण एक जटिल प्रक्रिया है।

हम निश्चित रूप से उम्मीद कर सकते हैं, कि जटिल कराधान नियमों से हमारे पसंदीदा पिज्जा की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं होगी।

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