मंगल ग्रह (Mars) के बारे में विस्तृत जानकारी निम्नलिखित है 

मंगल ग्रह (Mars) के बारे में विस्तृत जानकारी

मंगल ग्रह (Mars) के बारे में विस्तृत जानकारी निम्नलिखित है

सौर मंडल का सबसे बड़ा पर्वत मंगल पर ही है। इसको ओलिंप मोन्स नाम दिया गया है और यह 24 किलोमीटर ऊँचा है

मंगल ग्रह की मिट्टी में लौह खनिज़ की जंग लगने के कारण यह लाल दिखता है।

मंगल ग्रह के बारे में विस्तृत जानकारी

युनानी लोग मंगल ग्रह को Ares(एरेस) कहते हैं और इसे युद्ध का देवता मानते हैं। शायद लाल रंग के कारण मंगल को यह नाम दिया गया है।

मंगल ग्रह की सूर्य के ईर्द-गिर्द कक्षा दिर्घवृत (अंडाकार) है। इसके कारण मंगल के तापमान में सूर्य से दूरस्तिथ बिंदु और निकटस्थ बिंदू के मध्य 30 डिग्री सेल्सीयस का अंतर है।

मंगल पर भेजे गए यानो ने जो जानकारीया दी हैं उनके अनुसार मंगल की सतह काफी पुरानी है तथा क्रेटरो से भरी हुई है। परन्तु कुछ नयी घाटीयां, पहाड़ीयां और पठार भी है।

(क्रेटर किसी खगोलीय वस्तु पर एक गोल या लगभग गोल आकार के गड़्ढे को कहते हैं।)

मंगल की सतह पर किसी द्रव वस्तु के बहने के साफ सबूत मिले हैं। द्रव जल की संभावना अन्य द्रव पदार्थों से ज्यादा है।

मंगल पर भेजे यानो के द्वारा दिए गए आंकड़ो से साफ होता है कि मंगल पर बड़ी झीलें या सागर भी रहे होंगे।

मंगल ग्रह का औसतन तापामान -55 डिग्री सेल्सीयस है। इसकी सतह का तापमान 27 डिग्री सेल्सीयस से 133 डिग्री सेल्सीयस तक बदलता रहता है।

Mangal Grah का व्यास पृथ्वी के व्यास का लगभग आधा है परन्तु मंगल पर उपलब्ध भूमि पृथ्वी पर उपलब्ध भूमि के बराबर है।

मंगल का एक दिन 24 घंटे से थोड़ा ज्यादा होता है। मंगल का एक साल पृथ्वी के 687 दिनो के बराबर होता है, यानि लगभग 23 महीने के बराबर।

मंगल के ध्रुवो पर पानी और कार्बन डायआक्साईड की बर्फ की परत है।

उत्तरी गोलार्ध की गर्मियों में कारबन डायआक्साईड की परत पिघल जाती है और केवल पानी की बर्फ की तह रह जाती है।

मंगल की कक्षा में चक्कर काट रहे मार्स एक्सप्रेस ने इसको दक्षिणी गोलार्थ में भी होते देखा है। मंगल के अन्य स्थानों पर भी पानी की बर्फ होने की आशंका है।

जैसे हमारी पृथ्वी का उपग्रह चाँद है, इसी तरह मंगल के भी दो उपग्रह हैं – फोबोस और डीमोस। फोबोस का आकार डीमोस से बड़ा है।

यदि किसी व्यक्ति का वज़न पृथ्वी पर 100 किलो है तो मंगल ग्रह पर कम गुरूत्वाकर्षण की वजह से मात्र 37 किलोग्राम ही रह जाएगा।

मंगल के उपग्रह फोबोस का गुरूत्वाकर्षण तो पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण का एक हज़ारवां हिस्सा ही है ।

पृथ्वी पर 100 किलो वज़न वाले व्यक्ति का वज़न फोबोस पर 100 ग्राम ही रह जाएगा।

फोबोस पूरे सौर मंडल में अपने ग्रह से सबसे कम दूरी वाला उपग्रह है। इसकी मंगल की सतह से दूरी मात्र 6000 किलोमीटर है जबकि हमारी पृथ्वी और चाँद के बीच की दूरी लगभग 3 लाख 84 हज़ार किलोमीटर है।

भले ही फोबोस, मंगल के दूसरे उपग्रह डीमोस से बड़ा है पर फिर भी इसकी गिणती सौरमंडल के सबसे छोटे उपग्रहों में की जाती है। फोबोस का औसत व्यास 22.2 किलोमीटर है और डीमोस का तो मात्र 12.6 किोलमीटर ही है।

युनानी लोग फोबोस को शुक्र ग्रह का बेटा मानते हैं। फोबोस का ग्रीक भाषा में अर्थ होता है ‘भय’। फोबीया शब्द फोबोस से ही बना है। ग्रीक लोग इस उपग्रह को ‘भय का देवता’ मानते हैं।

फोबोस उपग्रह मंगल के आकाश में एक दिन में दो बार उदय हो कर अस्त होता है।

फोबोस हर 100 साल में 1.8 मीटर मंगल की और बढ़ जाता है। इस कारण अगले 5 करोड़ सालों में यह मंगल की सतह से टकरा जायेगा या फिर टूट कर मंगल के चारों ओर टुकड़ों में बिखर जाएगा।

फोबोस की सतह पर एक बड़ा क्रेटर स्टीकनी है जो इसके आविष्कारक हाल की पत्नी के नाम पर दिया गया है।

Mangal Graha के यह दोनो उपग्रह शायद कभी भी मंगल यात्रा के लिए एक अंतरिक्ष केन्द्र के रूप में प्रयोग किये जा सकते हैं।

वर्तमान समय में मंगल ग्रह का राज जानने के लिए 8 अभियान काम कर रहे हैं। इन में से 7 अमेरिका द्वारा है। गर्व की बात है कि बाकी का एक अभियान भारत द्वारा है।

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