मेरे प्रिय गुरुजी के बारे में रोचक कहानी

मेरे प्रिय गुरुजी के बारे में

मेरे प्रिय गुरुजी के बारे में रोचक कहानी निम्नलिखित तथ्यों के द्वारा लिखी गई है-

मेरे प्रिय गुरुजी के बारे में रोचक कहानी

 

1. प्रस्तावना – वर्तमान समय में शिक्षा का प्रमुख केन्द्र विद्यालय ही है। जहां विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने जाते हैं। शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों को शिक्षा दी जाती है। वे ही हमारे भावी जीवन का निर्माण कर, हमें अच्छा नागरिक बनाते हैं। शिक्षक हमारे लिए सम्माननीय व्यक्ति हैं। वे हम पर बहुत उपकार करते हैं। इसलिए उनको ‘गुरु ‘ का सम्मान दिया जाता है। और उन्हें गोविन्द से भी ऊंचा माना जाता है-

गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय।

बलिहारी गुरु आपणे, गोविंद दियो मिलाया।।

2.प्रिय शिक्षक – राजकीय उच्च  माध्यमिक विद्यालय, छौटू में 2017-2018 तक प्रधानाचार्य (श्रीमान भीखाराम चौधरी) के पद पर कार्यरत रहे थे वैसे तो हमारे विद्यालय के सभी अध्यापक विभिन्न विषयों के ज्ञाता और मेहनती हैं, किंतु जिस शिक्षक ने मुझे विशेष प्रभावित किया है, वे है हमारे विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री भीखाराम जी चौधरी। ये अपनी अनेक विशेषताओं के कारण हमारे प्रिय शिक्षक है। प्रधानाचार्य के पद पर कार्यरत रहते व्यक्त ये आठ घंटे तक बच्चों को पढ़ाते थे। और कार्यालय का काम बाद में करते थे। और ये घर से अध्ययन करके आते थे क्योंकि उनकी भावना थी कि बच्चों को टापिक समझने में कोई समस्या न हो। और ये बच्चों को साधारण भाषा में समझाने का पूरा प्रयास करते थे वो भी पूरे मन और लगन के साथ। ये कभी थकान महसूस नहीं करते थे। उनके जीवन का जीता-जागता उदाहरण- इनके (भीखाराम चौधरी) 28 फरवरी 2018 को सेवानिवृत्त होने पर एक कार्यक्रम रखा गया। जब स्कूल का समय था सुबह 09:30 से सांय 03:40 तक था ऐसे में हमारे विद्यालय के वरिष्ठ और अनुभवी शिक्षक श्री भोमाराम बेनीवाल ने उनको कहा कि हम कार्यक्रम की शुरुआत 03:30 से शुरू करेंगे तब इन्होंने कहा कि 03:40 से पहले कार्यक्रम शुरू नहीं करेंगे क्योंकि 10 मिनट तक बच्चों को पढ़ायेंगे। इतने समय के मूल्य के प्रति सचेत , जागरूक, और परहित के पक्ष में सकारात्मक सोच रखने वाले प्रिय गुरु की जितनी भी सहराना करु उतनी कम है और इनकी प्रशंसा करने के लिए मेरे पास इतने शब्द नहीं है जितना इन्होंने अपने समाज में योगदान दिया।

3.गुरु का महत्व– “तीन लोक नवखण्ड में, गुरु से बड़ो न कोय,जो करनी गुरु करें, दूजो करें न कोय।।

4.मेरे शिक्षक की विशेषताएंमेरे प्रिय शिक्षक मेरे विषयाध्यापक के साथ-साथ मेरे विद्यालय के प्रधानाचार्य भी है। वे हमारी कक्षा को अर्थशास्त्र पढ़ाते। वे एक योग्य और अनुभवी शिक्षक है। वे कठिन से कठिन पाठ को भी रुचिकर बनाकर पढ़ाते हैं। उनके पढ़ाने का तरीका इतना सरल और रोचक है कि सभी विद्यार्थी उनकी बात को बड़े ध्यान से सुनते हैं और ग्रहण करते हैं। पूरी कक्षा अनुशासित और उत्साहित होकर पढ़ती है। केवल पढ़ाने में ही नहीं, अपितु व्यक्तिगत गुणों के कारण भी वह मेरे प्रिय शिक्षक है। वे सादा जीवन उच्च विचार के पोषक है। विद्यालय और कक्षा में नियमित रूप से समय पर आना, विद्यार्थियों के साथ पुत्रवत् व्यवहार में स्नेह रखते हैं, ईमानदारी और परिश्रम के साथ पढ़ाना, गरीब छात्रों की मदद करना, हमेशा सत्य बोलना, दूसरों के साथ मधुर व्यवहार करना तथा पढ़ाई के साथ-साथ मनोरंजन भी करवाना, आदि ऐसे अनेक गुण है जो हमें प्रभावित करते हैं। इसके साथ ही विद्यालय के अन्य सहशैक्षणिक कार्यक्रमों में भी अपना उत्तरदायित्व आगे आकर हमेशा निभाते है। यही कारण है कि उनका शिक्षकों और विद्यार्थियों की आंखों में किरकिरी की तरह न होकर एक प्रेमी की तरह महसूस होते हैं।

5. उपसंहार– मेरे प्रिय शिक्षक योग्य, परिश्रमी, स्नेही, कर्मठ, ईमानदार, अनुशासन प्रिय एवं व्यवहार- कुशल है। पूरा विद्यालय ही नहीं बल्कि पूरा कस्बा उन्हें सम्मान की दृष्टि से देखता है। मेरी आकांक्षा है।

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