जनहित याचिका क्या है

जनहित याचिका क्या है और इसकी आवश्यकता क्यों

जनहित याचिका क्या है और इसकी आवश्यकता क्यों , इसके बारे में जानकारी निम्नानुसार है।

जनहित याचिका क्या है और इसकी आवश्यकता क्यों

 जनहित याचिका/ लोकहितवाद भारतीय कानून में सार्वजनिक हित की रक्षा या फायदे  के लिए मुकदमे का प्रावधान है। अन्य सामान्य अदालती याचिकाओं से अलग इसमें यह आवश्यक नहीं की पीड़ित पक्ष स्वयं अदालत में जाए। यह किसी भी नागरिक या स्वयं न्यायालय द्वारा पीडितों के पक्ष में दायर किया जा सकता है। यह एक सामूदायिक समस्याओं को समाज के किसी एक शिक्षित व्यक्ति उठाने का माध्यम है।

जनहित याचिका की इस प्रणाली ने भारत में पूर्व प्रचलित locus standi (केवल प्रभावित व्यक्ति ही न्याय पाने के अधिकार की अपील कर सकता है ) को बदल दिया। अब स्वतः संज्ञान के माध्यम से भी न्यायालय द्वारा (मीडिया रिपोर्टों, सोशल साइट्स इत्यादि को आधार बनाकर) कार्रवाई की जाती है। ध्यातव्य है कि भारत के पूर्व न्यायाधीश पी.एन. भगवती को ‘जनहित याचिका का पिता या जनक’ माना जाता है।

PIL से जुड़े मुद्दे/प्रावधान

यह कानूनी व्यवस्था के संसाधनों के लिये न्याय का हास्यस्पद उपकरण बन गया है जो सार्वजनिक हित में दायर की गई झूठी याचिकाओं में बढ़ोत्तरी कर रहा है। 

इससे व्यक्तिवाद, व्यवसाय या राजनीतिक एजेंडे को बढ़ावा देने की प्रवृत्ति में भी बढ़ोतरी हुई है।

परिणामस्वरूप जनहित याचिका ने स्वार्थपूर्ति के निहित हितों के उद्योगों को जन्म या बढ़ावा दिया है।

जनहित याचिका द्वारा ऐसे कुछ ही मुद्दों को उठाया जाता है जो वास्तव में लोकहित या वास्तविक कारणों को समर्पित होते हैं।

इसके अलावा ऐसी याचिकाएँ न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिये भी गंभीर खतरा पैदा करती हैं। 

ऐसी अप्रासंगिक याचिकाएँ न्यायालय के कीमती समय को भी बर्बाद करती हैं वह भी तब जब न्यायालय पर पहले से लंबित मामलों का अत्यधिक भार है।

पीआईएल की आवश्यकता क्यों है?

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों द्वारा कानून के शासन को संरक्षित करने और शासन की संरचनाओं के भीतर उत्तरदायित्व और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिये पीआईएल को एक शक्तिशाली साधन के रूप में माना गया था। 

जनहित याचिका का अत्यधिक उपयोग और दुरुपयोग केवल अप्रभावी बना सकता है अतः पीआईएल के संदर्भ में अब पूर्ण पुनर्विचार और पुनर्गठन की आवश्यकता जरूरी है।

चूँकि यह देश के सभी नागरिकों के लिये कम कीमत पर उपलब्ध एक असाधारण उपाय है इसलिये इसे केवल इसके मूल घटकों और वंचित लोगों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा से संबंधित मामलों तक सीमित कर देना चाहिये।

 इससे गरीबों को न्याय प्रदान करने के साधन के रूप में पीआईएल की वैधता और प्रभावकारिता को पुनर्स्थापित करने में मदद मिलेगी।

Read more posts…

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published.